पुणे में एक और जीबीएस मरीज की मौत, मरीजों की संख्या दाे साै के पार, जानिए डिटेल्स

Shwet Patra

रांची (RANCHI): पुणे जिले के खडक़वासला में गुलियन बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) पीड़ित एक और मरीज की मौत हो गई. जीबीएस से राज्य में अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर आठ हो गई. राज्य में अब तक जीबीएस के 203 मरीज मिल चुओ हैं, इनमें से 109 लोगों काे पूरी तरह ठीक होने के बाद छुट्टी दी जा चुकी है. सूबे के विभिन्न अस्पतालों में से 54 मरीज आईसीयू में इलाज करा रहे हैं, जबकि 20 वेंटिलेटर पर हैं.


प्लाज़्माफेरेसिस उपचार के बाद भी नहीं बची जान

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि खडक़वासला क्षेत्रवासी 59 वर्षीय व्यक्ति की जीबीएस से मौत हो गई. इस मरीज को 10 फरवरी को इलाज के लिए नवले अस्पताल में भर्ती कराया गया था. मरीज को बहुत कमजोरी महसूस हो रही थी और वह अपनी जगह से हिल भी नहीं पा रहा था. एनसीवी परीक्षण के बाद प्लाज़्माफेरेसिस उपचार किया गया. 11 फरवरी को मरीज को हार्ट अटैक आया था, लेकिन इलाज के दौरान ही गुरूवार तड़के 3.30 बजे मरीज की मौत हो गई.


क्या है जीबीएस

गिलियन-बर्रे सिंड्रोम (जीबीएस) एक तंत्रिका संबंधी विकार है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली परिधीय तंत्रिका तंत्र के एक हिस्से पर हमला करती है. इसकी शुरुआत अचानक और अप्रत्याशित हो सकती है. इसके लिए तुरंत अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है.

जीबीएस का कारण

ज़्यादातर मामलों में, जीबीएस ऑटोइम्यून न्यूरोपैथी परिधीय तंत्रिकाओं के माइलिन म्यान (तंत्रिका को ढकने वाला इन्सुलेशन और अंतर्निहित तंत्रिका तंतुओं की रक्षा करने वाला) को नुकसान के कारण होती है.

जीबीएस का इलाज

वर्तमान में जीबीएस का कोई इलाज नहीं है, लेकिन उपचार से इसे नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है. एक तरीका है इम्यूनोग्लोबुलिन थेरेपी, जिसमें दाता से IV के माध्यम से अंतःशिरा रूप से एंटीबॉडी प्राप्त करना शामिल है. इससे ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया को कम करने में मदद मिल सकती है.

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